आखिर क्यों अच्छे लोगो के साथ ही बुरा होता है, क्या अच्छाई का मतलब केवल दुःख झेलना होता है
यूँ तो इस दुनिया में ऐसे बहुत से लोग जो दूसरो का भला करने से कभी नहीं चूकते. मगर अफ़सोस कि दूसरो का भला करने के बदले में भी उन्हें तारीफ नहीं बल्कि दुःख ही मिलते है. यानि अगर हम सीधे शब्दों में इस दुनिया में नाजाने क्यों अच्छे लोगो के साथ ही बुरा होता है. जी हां इस सवाल का जवाब तो आज तक कई लोग ढूंढ रहे है. हालांकि ये डायलाग आपने कई बार हिंदी फिल्मो में सुना होगा, लेकिन आपको कभी भी इसका जवाब नहीं मिल पाया होगा. बहरहाल आज हम आपको बताते है कि आखिर क्यों अच्छे लोगो के साथ ही बुरा होता है.

आखिर क्यों अच्छे लोगो के साथ ही बुरा होता है..
१. भावुक होना.. गौरतलब है कि जो अच्छे लोग होते है वह स्वभाव से बहुत ज्यादा भावुक होते है. जी हां ऐसे लोग किसी को तकलीफ में देख कर खुद पर नियंत्रण नहीं कर पाते और खुद ही मुसीबत को गले लगा लेते है. यानि इनकी भावुकता के कारण दूसरे लोग इनका फायदा उठाते है. बता दे कि जो लोग अच्छे होते है, वह कभी भी दूसरो को किसी काम के लिए या किसी चीज के लिए मना नहीं कर पाते और यही उनकी सबसे बड़ी कमजोरी होती है. यानि अगर हम साफ शब्दों में कहे तो दूसरो का दिल रखने के चक्कर में ये लोग बुरी तरह से फंस जाते है.
३. जरूरत से ज्यादा दयालुता दिखाना.. गौरतलब है कि जो अच्छे लोग होते है, वह इतने ज्यादा दयालु होते है कि दूसरो को बिना मांगे ही सब कुछ दे देते है. हालांकि दयालु होने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन किसी भी इंसान को इतना ज्यादा दयालु नहीं होना चाहिए कि सामने वाला इंसान आपकी दयालुता का फायदा उठाने लगे. मगर अफ़सोस कि अच्छे लोगो को ये बात कभी समझ नहीं आती. अब जाहिर सी बात है कि जो लोग अच्छे होते है, उनके मन में कोई भी स्वार्थ या लालच की भावना नहीं होती. जी हां इस तरह के लोग कोई भी काम पैसो के लिए नहीं करते, बल्कि दूसरो की भलाई के लिए ही करते है. हालांकि कुछ लोग इनकी इस आदत का गलत फायदा भी उठा लेते है. बता दे कि ये लोग दूसरो की आर्थिक रूप से मदद करने से भी पीछे नहीं हटते.
बहरहाल अब तो आप समझ ही गए होंगे कि आखिर क्यों अच्छे लोगो के साथ ही बुरा होता है.
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hello everyone, my name is Rajni Goyal. i am a writer but on the other side i love music. to be very frank i also even don’t know what i want to do in my life. लेकिन अगर अपनी भाषा मैं कहूं तो…. भटकती हुई मुसाफिर हूँ, मंजिल की तलाश है, जहाँ मंजिल दिख जाएँ वही लिखा हमारी किस्मत का असली आगाज है।



